शुक्रवार, 4 मई 2007

क्या आप अपनी प्रतिभा पहचानते हैं ??? again career beyond ur academics..........

Its India
People here are born intelligent and every1 has some hidden talent.Some find it frm childhood and start moving towards it..
But some spend their whole life in finding tht wht's their purpose of taking birth.They keep on searching their expertise for full lifetime and one day they die leaving few tears behind...

But ppl who are born to be sm1.Some1 who r called as Legend,Sir,Icons,Divas & even Stars,keep themselves alive via making their presence in mind & hearts of millions of ppl even after their Death......

If u hve an aim I will show u the way,,if u don't and want to I we wld help u in finding tht too...

Remember that no CROW can fly high, wid EAGLE'S wings, it has 2 be that kind of DETERMINATION, n inborn quality 2 be a true HIGH FLYER!!!!!

TRUE heroes RISE from the ashes of CHAOS!!!!

Life is full of ups n downs, dont get bogged down if THINGS GO WRONG, n dont get overjoyed wid ur SUCCESS.....

At last, always remember one thing,

!!!!!!GOD IS THERE!!!!!!


पंडित अभिलाष कुररिया

"निंदक नियरे राखिये,आंगन कुटी छबाए"
"पानी बिन साबुन बिना , निर्मल करे सुभाए "

http://www.orkut.com/Profile.aspx?uid=1637515589800890634

बुधवार, 2 मई 2007

आख़िर जिस रजनीश को हिंदुस्तानियों ने.....

उस भारत की तलाश में जिसमें कभी सूरवीरों और महान ज्ञानियों ने जन्म लिया था। अगर रामायण और महाभारत सिर्फ एक काव्य नही हकीकत हैं तो फिर यकीनन दुनिया का सबसे पहले परमाडू हिंदुस्तान के ही नाम होना चाहिए। ना सिर्फ ये हकीकतें बल्कि हम उन सारी हकीकतों पर बहस करेंगे जिनमें हम आज तक ध्यान ही नही दे पाए। यहाँ हम सिर्फ गुलाम होने के सालों पहले वाले भारत कि बात करेंगे , या फिर आज के ।


क्या मंत्रों में सचमुच वो असीम ताक़त है जिनका जिक्र काव्यों में किया गया था?

क्या योग को भूलना ही हिंदुस्तान के गुलाम होने का कारण था?

आख़िर उन सूरवीरों और ज्ञानियों ने हिंदुस्तान में जन्म बंद क्यों कर दिया,क्या कृष्ण , चाणक्य और शकुनी कि तरह चालाक लोग और बडे बडे पराक्रमी राज्यों को सिर्फ अपने दिमाग के बल पर हराने वाले दिमाग अगर अक्सर जन्म लेते तो क्या ईस्ट इंडिया कंपनी अपने मंसूबों में कामयाब होती ?

आख़िर योग भारत में इतने साल बाद क्यों लौटा ?

क्यों आज भी हिंदुस्तान कि 90% युवा पीढ़ी योगा करने वालों पर हँसते हैं और जिमखाना और कराते को ज्यादा महत्व देते हैं ?

आख़िर जिस रजनीश को हिन्दुस्तानी जनता पागल और उत्तेजित भाषी वक्ता के नाम से नवाजते थे । अमेरिका को उस से ख़तरा क्यों लगने लगा था और हम अब उसके अनुयायियों और आश्रमों कि आवा भगत क्यों करते हैं । क्या हमारे देश के लोग आज भी उस "ओशो" की कही बातों को समझते हैं या फिर वही एक भेडिया दशान मानसिकता के कारण शांति और कभी कभी ओपन सेक्स ढूड़ने जाते हैं , कभी कभी तो मानसिकता सिर्फ विदेशी बालाओं को देखने जाने भर कि होती है ?




आपके विचार और कटाक्ष कि कामना करते हुए आपका ही एक भाई
अभिलाष कुररिया

"निंदक नियरे राखिये,आंगन कुटी छबाए"
"पानी बिन साबुन बिना , निर्मल करे सुभाए "

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बुधवार, 25 अप्रैल 2007

हम किस गली जा रहे हैं....

प्रिय मित्रों को मेरा सादर अभिनंदन ,
हमेशा कि तरह में उन कुछ तथ्यों कि तरफ आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ जिसे हम अधिकतर अपने आस पास देखते तो हैं , किन्तु सिस्टम को भला बुरा कह कर आगे बढ जाते हैं।
हिन्दुस्तान एक बड़ा देश है....ना सिर्फ जनसँख्या या भ्रस्टाचार में बल्कि एक और चीज में जिसपर हमारा ध्यान अक्सर ना के बराबर जाता है और वो है यहाँ कि "भेडिया दशान " मानसिकता।

नयी उम्र के लोगो ने यह शब्द शायद सुना ना होगा और सुना भी होगा तो उनके मुख से जिनकी बातें हम अक्सर एक कान से सुनकर दुसरे कान से बाहर निकाल देते हैं । जी हाँ हमारे आदरणीय माता पिता एवम बुजुर्ग । जिनके मुख से निकली बातों को अधिकतर हम मजाक में ज्ञान कि संज्ञा देते हैं। बिना यह जाने कि ज्ञान का मतलब क्या होता है और इसकी उत्पत्ति कहाँ से हुई है।

इसीलिये जो देश कभी ज्ञानियों कि जननी हुआ कर्ता था आजकल सिर्फ नौकर और गुलाम पैदा कर रहा है।
कभी ईस्ट इंडिया कंपनी के तो कभी माईक्रोसोफ्ट के । में जानता हूँ कि जिन्हे मेरा ये तर्क समझ आ गया वो मुस्कुरा रहे होंगे ओ जिन्हे नही आया वो एक और ग्यानी के पैदा होने कि बधाई देंगे ।
और ऐसे करते करते एक और युग बीट जाएगा और आने वाली पीढ़ी को कोई यह भी नही बता पायेगा कि प्रोफेस्नलिस्म कुछ और नही गीता उपदेश जो किसी कृष्ण ने युद्घ भूमि में कही थी उसका एक चुराया हुआ छीड़ मात्र है। किन्तु तब तक कोई इस तर्क को सही ठहराने वाला शायद जीवित ही नही बचेगा......

अतः मेरा यह प्रयास कि हम उन सारी बातों पर पुनः गौर करें और अपनी आने वाली पीढ़ी को कुछ बहुमूल्य देकर जाएँ । क्यूंकि क्या पता उन्हें समझाने वाला कोई "कल हो ना हो "।


आपके विचार कि कामना करते हुए आपका ही एक भाई
अभिलाष कुररिया
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मंगलवार, 24 अप्रैल 2007

Career…….beyond ur academics……

Yes its not the only education that decides ur career path……..its You ,your atmosphere & friends since childhood that make u an eligible person in ur respective field……

India is a big country………..not as per the population and corruption…….but due to rumours & Hypes also…….

Every right what you might have studied at ur school text books are the only cause of our back steps…………….

We are helpless and we don’t have any other options left beside Wearing Jeans burning khadi, Roaming inside malls (by converting the parks into them ) and Serving & blindly following the same old Western Culture & so called GORAs

No1 is seeing towards after the next 40 years coz neither we have time for that nor we care,,,infact our lifestyle can’t afford that too…………

But yes………………….just think once…….just remember ur school text books……the old Indian one………..u might be getting an impression that events in India are always a cattle walk……….and nothing here is left Original and Our own Created…………

भारत_एक_खोज

सभी सदस्यों को मेरा हार्दिक प्रणाम
में कुशल पूर्वक हूँ एवम आपके कुशलतापूर्वक होने की उम्मीद करता हूँ

अग्र समाचार यह है कि में आपके इस ब्लौग में अपना भी कुछ योगदान देना चाहता हूँ
चूकिं मेरी यह धारणा है कि इन्सान जीवन भर सीखता है और यह ब्लौग एक ऐसा केंद्र है जहाँ दुनिया भर के लोग किसी विषय या व्यक्ति विशेष पर अपने विचार प्रस्तुत करते हैं ......
अतः मेरी यह उम्मीद है कि ये ब्लौग हमें उस अपार ज्ञान को प्रदान करेगा और हमें अपने देश को और अच्छी तरह जानने का मौका मिलेगा
जहाँ हम स्वस्थ मन से हर किसी के विचार को जान सकेंगे....
और मेरी यह प्रार्थना स्वीकार करें कि हम स्वस्थ और शांत मन से एक दुसरे के विचार सुनें एवम ग्रहन करें और उचित जगह पर कटाक्ष भी प्रदान करें

और अंत में में एक महान कवि कि एक पंक्ति के साथ समाप्त कर्ता हूँ जो कि जीवन में हर वक़्त मुझे काम आयी

"निंदक नियरे राखिये,आंगन कुटी छबाए"
"पानी बिन साबुन बिना , निर्मल करे सुभाए "



धन्यवाद
अभिलाष कुररिया