बुधवार, 2 मई 2007

आख़िर जिस रजनीश को हिंदुस्तानियों ने.....

उस भारत की तलाश में जिसमें कभी सूरवीरों और महान ज्ञानियों ने जन्म लिया था। अगर रामायण और महाभारत सिर्फ एक काव्य नही हकीकत हैं तो फिर यकीनन दुनिया का सबसे पहले परमाडू हिंदुस्तान के ही नाम होना चाहिए। ना सिर्फ ये हकीकतें बल्कि हम उन सारी हकीकतों पर बहस करेंगे जिनमें हम आज तक ध्यान ही नही दे पाए। यहाँ हम सिर्फ गुलाम होने के सालों पहले वाले भारत कि बात करेंगे , या फिर आज के ।


क्या मंत्रों में सचमुच वो असीम ताक़त है जिनका जिक्र काव्यों में किया गया था?

क्या योग को भूलना ही हिंदुस्तान के गुलाम होने का कारण था?

आख़िर उन सूरवीरों और ज्ञानियों ने हिंदुस्तान में जन्म बंद क्यों कर दिया,क्या कृष्ण , चाणक्य और शकुनी कि तरह चालाक लोग और बडे बडे पराक्रमी राज्यों को सिर्फ अपने दिमाग के बल पर हराने वाले दिमाग अगर अक्सर जन्म लेते तो क्या ईस्ट इंडिया कंपनी अपने मंसूबों में कामयाब होती ?

आख़िर योग भारत में इतने साल बाद क्यों लौटा ?

क्यों आज भी हिंदुस्तान कि 90% युवा पीढ़ी योगा करने वालों पर हँसते हैं और जिमखाना और कराते को ज्यादा महत्व देते हैं ?

आख़िर जिस रजनीश को हिन्दुस्तानी जनता पागल और उत्तेजित भाषी वक्ता के नाम से नवाजते थे । अमेरिका को उस से ख़तरा क्यों लगने लगा था और हम अब उसके अनुयायियों और आश्रमों कि आवा भगत क्यों करते हैं । क्या हमारे देश के लोग आज भी उस "ओशो" की कही बातों को समझते हैं या फिर वही एक भेडिया दशान मानसिकता के कारण शांति और कभी कभी ओपन सेक्स ढूड़ने जाते हैं , कभी कभी तो मानसिकता सिर्फ विदेशी बालाओं को देखने जाने भर कि होती है ?




आपके विचार और कटाक्ष कि कामना करते हुए आपका ही एक भाई
अभिलाष कुररिया

"निंदक नियरे राखिये,आंगन कुटी छबाए"
"पानी बिन साबुन बिना , निर्मल करे सुभाए "

http://www.orkut.com/Profile.aspx?uid=1637515589800890634

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