बुधवार, 25 अप्रैल 2007

हम किस गली जा रहे हैं....

प्रिय मित्रों को मेरा सादर अभिनंदन ,
हमेशा कि तरह में उन कुछ तथ्यों कि तरफ आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ जिसे हम अधिकतर अपने आस पास देखते तो हैं , किन्तु सिस्टम को भला बुरा कह कर आगे बढ जाते हैं।
हिन्दुस्तान एक बड़ा देश है....ना सिर्फ जनसँख्या या भ्रस्टाचार में बल्कि एक और चीज में जिसपर हमारा ध्यान अक्सर ना के बराबर जाता है और वो है यहाँ कि "भेडिया दशान " मानसिकता।

नयी उम्र के लोगो ने यह शब्द शायद सुना ना होगा और सुना भी होगा तो उनके मुख से जिनकी बातें हम अक्सर एक कान से सुनकर दुसरे कान से बाहर निकाल देते हैं । जी हाँ हमारे आदरणीय माता पिता एवम बुजुर्ग । जिनके मुख से निकली बातों को अधिकतर हम मजाक में ज्ञान कि संज्ञा देते हैं। बिना यह जाने कि ज्ञान का मतलब क्या होता है और इसकी उत्पत्ति कहाँ से हुई है।

इसीलिये जो देश कभी ज्ञानियों कि जननी हुआ कर्ता था आजकल सिर्फ नौकर और गुलाम पैदा कर रहा है।
कभी ईस्ट इंडिया कंपनी के तो कभी माईक्रोसोफ्ट के । में जानता हूँ कि जिन्हे मेरा ये तर्क समझ आ गया वो मुस्कुरा रहे होंगे ओ जिन्हे नही आया वो एक और ग्यानी के पैदा होने कि बधाई देंगे ।
और ऐसे करते करते एक और युग बीट जाएगा और आने वाली पीढ़ी को कोई यह भी नही बता पायेगा कि प्रोफेस्नलिस्म कुछ और नही गीता उपदेश जो किसी कृष्ण ने युद्घ भूमि में कही थी उसका एक चुराया हुआ छीड़ मात्र है। किन्तु तब तक कोई इस तर्क को सही ठहराने वाला शायद जीवित ही नही बचेगा......

अतः मेरा यह प्रयास कि हम उन सारी बातों पर पुनः गौर करें और अपनी आने वाली पीढ़ी को कुछ बहुमूल्य देकर जाएँ । क्यूंकि क्या पता उन्हें समझाने वाला कोई "कल हो ना हो "।


आपके विचार कि कामना करते हुए आपका ही एक भाई
अभिलाष कुररिया
http://www.orkut.com/Profile.aspx?uid=1637515589800890634

कोई टिप्पणी नहीं: