मंगलवार, 24 अप्रैल 2007

भारत_एक_खोज

सभी सदस्यों को मेरा हार्दिक प्रणाम
में कुशल पूर्वक हूँ एवम आपके कुशलतापूर्वक होने की उम्मीद करता हूँ

अग्र समाचार यह है कि में आपके इस ब्लौग में अपना भी कुछ योगदान देना चाहता हूँ
चूकिं मेरी यह धारणा है कि इन्सान जीवन भर सीखता है और यह ब्लौग एक ऐसा केंद्र है जहाँ दुनिया भर के लोग किसी विषय या व्यक्ति विशेष पर अपने विचार प्रस्तुत करते हैं ......
अतः मेरी यह उम्मीद है कि ये ब्लौग हमें उस अपार ज्ञान को प्रदान करेगा और हमें अपने देश को और अच्छी तरह जानने का मौका मिलेगा
जहाँ हम स्वस्थ मन से हर किसी के विचार को जान सकेंगे....
और मेरी यह प्रार्थना स्वीकार करें कि हम स्वस्थ और शांत मन से एक दुसरे के विचार सुनें एवम ग्रहन करें और उचित जगह पर कटाक्ष भी प्रदान करें

और अंत में में एक महान कवि कि एक पंक्ति के साथ समाप्त कर्ता हूँ जो कि जीवन में हर वक़्त मुझे काम आयी

"निंदक नियरे राखिये,आंगन कुटी छबाए"
"पानी बिन साबुन बिना , निर्मल करे सुभाए "



धन्यवाद
अभिलाष कुररिया

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